भिलाई से आसमान तक: कैसे भारतीय इस्पात ने थामा दुनिया का सबसे ऊँचा रेल पुल…"

 स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) ने कुल 16,000 टन स्टील चिनाब ब्रिज निर्माण के लिए आपूर्ति की, जिसमें से 12,000 टन स्टील भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) द्वारा प्रदान किया गया था ।





यह स्टील प्लेट्स, TMT बार और स्ट्रक्चरल इस्पात से बनी थी—जिसमें 5,922 टन TMT, 6,454 टन प्लेट्स, और 56 टन स्ट्रक्चरल स्टील शामिल था ।



संरचना और इंजीनियरिंग का चमत्कार


चिनाब रेलवे ब्रिज 359 मीटर ऊपर नदी तल से स्थित है—यह ऊँचाई एफिल टॉवर से 35 मीटर अधिक है ।


इसकी लंबाई लगभग 1.3 किलोमीटर है, जिसमें मुख्य आर्च का स्पैन 467 मीटर है ।


पूरे प्रोजेक्ट में लगभग 29,000 टन स्टील, 10 लाख क्यूबिक मीटर अर्थवर्क, और 66,000 क्यूबिक मीटर कंक्रीट का उपयोग हुआ ।




टिकाऊ और सुरक्षित डिजाइन


यह पुल हवा के 266 किमी/घंटा की रफ्तार और जोरदार भूकंप (8 रिक्टर) से भी सुरक्षित है ।


DRDO की मदद से यह ‘ब्लास्ट‑प्रूफ’ बनाया गया, ताकि दूरी से संभावित धमाकों का असर कम किया जा सके ।


इसे 120 साल तक कार्यशील बनाए रखने की क्षमता है ।



ट्रायल और उद्घाटन का क्षण


जून 2024 में इसी पुल पर 8‑कोच MEMU ट्रेन का सफल ट्रायल रन हुआ ।


अंततः, 6 जून 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे शिलान्यास किया, जिससे यह दुनिया का सबसे ऊँचा रेल पुल बन गया ।





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📌 भिलाई का डीएमपी यानी ‘मेड इन भिलाई’


भिलाई इस्पात संयंत्र ने इस प्रोजेक्ट में सेना‑गुणवत्ता का स्टील उपलब्ध करा राष्ट्रीय संरचनाओं में अपनी विशेषज्ञता सिद्ध की:


मुंबई का बांद्रा‑वर्ली सी‑लिंक, INS विक्रांत जैसी सैन्य पोत, और सेला एवं अटल सुरंगें—इन सभी में भिलाई स्टील का उपयोग रहा ।


भिलाई संयंत्र ने उच्च‑ग्रेड TMT बार विकसित किए हैं जो भूकम्परोधी और जंग‑रोधी हैं ।



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